(N/A) अर्ध-आयु काल: अभिक्रिया की अर्ध-आयु वह समय है जिसमें अभिकारक की सांद्रता उसकी प्रारंभिक सांद्रता की आधी हो जाती है। इसे $(t_{1/2})$ के रूप में दर्शाया जाता है।
शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए व्युत्पत्ति:
शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए समाकलित वेग समीकरण है:
$k = \frac{[R]_{0} - [R]}{t}$
अर्ध-आयु पर:
$t = t_{1/2}$
$[R] = \frac{1}{2} [R]_{0}$
इन मानों को वेग समीकरण में रखने पर:
$k = \frac{[R]_{0} - \frac{1}{2} [R]_{0}}{t_{1/2}}$
$k = \frac{\frac{1}{2} [R]_{0}}{t_{1/2}}$
$t_{1/2}$ के लिए समीकरण को व्यवस्थित करने पर:
$t_{1/2} = \frac{[R]_{0}}{2k}$
अतः,शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्ध-आयु अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता के सीधे समानुपाती होती है।